कश्मीर के अलगावादी नेताओं की संलिप्तता को नज़रअंदाज किया जा रहा था। राज्यपाल शासन लागते ही युवाओं को भड़ाकाने वालोें पर कार्यवाही शुरू हो गई। यासिन मलिक को गुरुवार को हिरासत में ले लिया गया वहीं हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के मीरवाइज उमर फारुक को नजरबंद कर दिया गया। अलगाववादी विरोध प्रदर्शन की अगुवाई नहीं कर सकें।
सीजफायर के समय आतंकी घटनाओं में बेतहाशा बढ़ोत्तरी हुई थी। वरष्ठि पत्रकार शुजात बुखारी की हत्या के बाद हालात को और बिगाड़ने की कोशिश कर रहे अलगाववादियों ने हड़ताल की घोषणा की थी।
Photo Courtesy; PTI

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें