प्रधानमंत्री के संबोधन का मूल पाठ ( 26.08.2018) मेरे प्यारे देशवासियो ! नमस्कार। आज पूरा देश रक्षाबंधन का त्योंहार मना रहा है। सभी देशवासियों को इस पावन पर्व की बहुत-बहुत शुभकामनाएँ। रक्षाबंधन का पर्व बहन और भाई के आपसी प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। यह त्यौहार सदियों से सामाजिक सौहार्द का भी एक बड़ा उदाहरण रहा है। देश के इतिहास में अनेक ऐसी कहानियाँ हैं , जिनमें एक रक्षा सूत्र ने दो अलग-अलग राज्यों या धर्मों से जुड़े लोगों को विश्वास की डोर से जोड़ दिया था। अभी कुछ ही दिन बाद जन्माष्टमी का पर्व भी आने वाला है। पूरा वातावरण हाथी , घोड़ा , पालकी – जय कन्हैयालाल की , गोविन्दा-गोविन्दा की जयघोष से गूँजने वाला है। भगवान कृष्ण के रंग में रंगकर झूमने का सहज आनन्द अलग ही होता है। देश के कई हिस्सों में और विशेषकर महाराष्ट्र में दही-हाँडी की तैयारियाँ भी हमारे युवा कर रहे होंगे। सभी देशवासियों को रक्षाबन्धन एवं जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। ‘ प्रधानमन्त्रि-महोदय! नमस्कारः। अहं चिन्मयी , बेंगलुरु-...